स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
जो अनुपस्थित है उसकी तलाश; स्व का खोजी पहलू।
मन की सार्वभौमिक भाषा में, जैसा CHITTA इसे डिकोड करता है, सपने में «खोज» इस बात का प्रतीक है: जो अनुपस्थित है उसकी तलाश; स्व का खोजी पहलू। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन प्रतीक «खोज» क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि यह प्रतीक आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'खोज' की क्रिया स्व के उस खोजी पहलू का प्रतीक है जो किसी अनुपस्थित या अप्राप्त चीज़ की तलाश में है। मन की सार्वभौमिक भाषा में खोजना यह दर्शाता है कि आपकी चेतना का कोई अंश पूर्णता, उत्तर या किसी ऐसे गुण को ढूँढ़ रहा है जिसे आपने अब तक अपने भीतर पहचाना नहीं है। ध्यान दें कि आप क्या और किस अवस्था में खोज रहे हैं — व्याकुलता से या शांति से। जिस वस्तु को आप ढूँढ़ रहे हैं, वह प्रायः बाहर नहीं, बल्कि आपके भीतर ही विद्यमान है। यह प्रतीक आपको स्मरण कराता है कि जिस पूर्णता की आप तलाश में हैं, उसकी जड़ आपकी अपनी जागरूकता के विकास में है। बाहर भटकने के बजाय भीतर मुड़ें — जो खोया लगता है, वह वहीं प्रतीक्षा कर रहा है।