स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
अपने भीतरी अधिकार, अपने अतिचेतन मन को जानने से रची गई स्थिरता
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में सिंहासन का अर्थ है अपने भीतरी अधिकार, अपने अतिचेतन मन को जानने से रची गई स्थिरता। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन सिंहासन क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि सिंहासन आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'सिंहासन' उस स्थिरता का प्रतीक है जो अपने भीतरी अधिकार — अपने अतिचेतन मन — को जानने से रची जाती है। सिंहासन एक शासक का आसन है — वह स्थान जहाँ से अधिकार का प्रयोग होता है और राज्य का शासन चलता है। मन की सार्वभौमिक भाषा में, सिंहासन उस स्थिर शक्ति-स्थिति को दर्शाता है जो अपने अतिचेतन मन — अपनी ही चेतना के भीतर के उच्चतम अधिकार — को जानने और उससे जुड़ने से आती है। जब आप अपने भीतरी राज्य के सिंहासन पर विराजते हैं, तो आप आध्यात्मिक अधिकार के स्थान से संचालित होते हैं। आप अपना उद्देश्य जानते हैं। आप अपनी शक्ति जानते हैं। आप परम से अपने जुड़ाव को जानते हैं। यह बोध अडिग स्थिरता रचता है। जब सिंहासन आपके स्वप्न में प्रकट होता है, तो वह आपको अपने भीतरी अधिकार को ग्रहण करने के लिए पुकारता है। दिशा के लिए स्वयं से बाहर देखना बंद करें। सिंहासन आपके भीतर है। अधिकार आपके भीतर है। अतिचेतन मन — परम सृष्टिकर्ता से आपका जुड़ाव — आपका जन्मसिद्ध अधिकार है। अपने सिंहासन पर विराजें और अपने भीतरी राज्य का शासन विवेक, उद्देश्य और शक्ति के साथ करें।