स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
स्व के समस्त पहलू
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में संसार का अर्थ है स्व के समस्त पहलू। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन संसार क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि संसार आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'संसार' स्व के समस्त पहलुओं का प्रतीक है। संसार आपके अनुभव में विद्यमान हर चीज़ की समग्रता है। मन की सार्वभौमिक भाषा में संसार आपकी चेतना के पूर्ण चित्र को दर्शाता है — हर पहलू, हर गुण, हर स्तर, सब मिलकर एक एकीकृत, जीवंत तंत्र के रूप में। यह सबसे विराट चित्र है जो स्वप्न-भाषा दिखा सकती है। एक घर आपको एक मनोदशा दिखाता है, एक नगर मनोदशाओं का समूह, एक देश एक मनोवृत्ति, पर संसार आपको सब कुछ दिखाता है — आप जो हैं उसकी समग्रता। संसार आप ही हैं, बाहर प्रकट हुए। आप कोई एक गुण नहीं, बल्कि यह सब हैं — प्रकाश और अंधकार, ज्ञात और अज्ञात, विकसित और अविकसित। इस सब का उत्तरदायित्व लें। जब आप स्वयं को बदलते हैं, तो आप अपना संसार बदलते हैं। संसार आपकी अपनी चेतना में आरंभ और समाप्त होता है।