सपनों, चेतना और मन की सार्वभौमिक भाषा पर अंतर्दृष्टि
आपसे कुछ छीना नहीं जा रहा। जिस आदत पर आप चलते थे वह पूरी हो गई, और आपका मन आपको उसकी रसीद दिखा रहा है।