सपनों, चेतना और मन की सार्वभौमिक भाषा पर अंतर्दृष्टि
यह कभी आपकी नौकरी या आपका शहर था ही नहीं। जो सीमा हर बदलाव के पार आपका पीछा करती है, वह उनमें से किसी में थी ही नहीं।