स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
भ्रम या अस्पष्ट सोच
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में कोहरा का अर्थ है भ्रम या अस्पष्ट सोच। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन कोहरा क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि कोहरा आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'कोहरा' भ्रम अथवा अस्पष्ट सोच का प्रतीक है। मन की सार्वभौमिक भाषा में जल चेतन जीवन-अनुभवों का प्रतिनिधित्व करता है। कोहरा अति सूक्ष्म जल-कणों से बना होता है जो हवा में बिखरकर दृष्टि को धुँधला कर देते हैं। इस प्रकार कोहरा उस मानसिक अवस्था का प्रतीक है जहाँ आपके जीवन-अनुभव इतने बिखरे और अनिश्चित हो गए हैं कि आप स्पष्ट रूप से आगे का मार्ग नहीं देख पाते। तथ्य तो वहीं हैं, पर वे एक धुँधलके में लिपटे हैं जो आपकी समझ को मंद कर देता है। कोहरे की सघनता पर ध्यान दें। क्या वह इतना घना है कि कुछ भी दिखाई नहीं देता? क्या वह छँट रहा है, यह सुझाता हुआ कि स्पष्टता धीरे-धीरे लौट रही है? क्या आप कोहरे में सावधानी से आगे बढ़ रहे हैं, या भयभीत होकर रुक गए हैं? जब स्वप्न में कोहरा प्रकट होता है, तो वह बताता है कि आपके जीवन का कोई क्षेत्र इस समय स्पष्टता से वंचित है, और निर्णय लेने से पहले धैर्य की आवश्यकता है। कोहरा अनंत नहीं होता -- वह सूर्य के उदित होते ही छँट जाता है। अपनी जागरूकता के प्रकाश को एकाग्रता और ध्यान के माध्यम से तीव्र कीजिए, और प्रतीक्षा कीजिए। जैसे-जैसे आपकी आंतरिक स्पष्टता बढ़ेगी, धुँधलका छँटेगा और मार्ग स्वयं प्रकट हो जाएगा।