स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
अतिचेतन मन (सुपरकॉन्शियस माइंड)
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में दादा-दादी / नाना-नानी का अर्थ है अतिचेतन मन (सुपरकॉन्शियस माइंड)। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन दादा-दादी / नाना-नानी क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि दादा-दादी / नाना-नानी आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
अतिचेतन मन वह मन है जिसका उपयोग आत्मा पाँचवें आयाम में करती है। अतिचेतन मन में एक स्त्रैण/ग्रहणशील गुण होता है, जो इस मन का प्रयोजन है, और एक पुरुषोचित/सक्रिय गुण होता है, जो इस मन का कर्तव्य या कार्य है। अतिचेतन मन का प्रयोजन उस ब्लूप्रिंट को साकार करना है जिसे आपने अपनी आत्मा और अपने जीवन-उद्देश्य के लिए स्वयं रचा है। यह ब्लूप्रिंट अतिचेतन मन के भीतर संचित है, ग्रहणशील है, और आपके ध्यान की प्रतीक्षा कर रहा है। अतिचेतन मन का कर्तव्य शेष समस्त स्व को जीवनशक्ति-ऊर्जा से भरना है। यही हमारी जीवनशक्ति का आंतरिक स्रोत है। जब भीतर से कोई आंतरिक उमंग उठती है कि आप अपने उद्देश्य के अनुरूप कुछ करें, तो वह अतिचेतन मन से आती जीवनशक्ति-ऊर्जा ही है जो आपको आपका प्रयोजन पूरा करने की शक्ति देती है। श्वास ही आत्मा और अतिचेतन मन से जुड़ने की कुंजी है, क्योंकि 'स्पिरिट' शब्द ग्रीक शब्द Spiritus और लैटिन शब्द Spirare से आया है, जिन दोनों का अर्थ है — श्वास। स्वप्न में दादा-दादी या नाना-नानी का दिखना आपको इस उच्चतम चेतना-स्तर की ओर लौटने का आमंत्रण है — श्वास के माध्यम से भीतर जाएँ और उस अंतर्निहित ज्ञान तथा ऊर्जा से जुड़ें जो सदा आपके भीतर उपलब्ध है।