स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
स्वयं के विकसित हो रहे किसी पहलू के कारण के प्रति अनभिज्ञता
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में अनाथ का अर्थ है स्वयं के विकसित हो रहे किसी पहलू के कारण के प्रति अनभिज्ञता। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन अनाथ क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि अनाथ आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'अनाथ' स्वयं के किसी विकसित हो रहे पहलू के कारण या उद्गम के प्रति अनभिज्ञता का प्रतीक है। अनाथ वह बालक है जिसके माता-पिता नहीं होते -- जिसका कोई ज्ञात स्रोत या रचयिता नहीं होता। मन की सार्वभौमिक भाषा में माता-पिता उन पहलुओं के कारण या उद्गम का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन्हें वे रचते हैं। अतः अनाथ आपके भीतर के उस गुण का प्रतीक है जो विकसित तो हो रहा है पर जिसका उद्गम आप नहीं समझते। आपके भीतर एक गुण बढ़ रहा है जिसे आप उसके स्रोत तक नहीं जोड़ पाते। आप नहीं जानते कि यह कहाँ से आया, क्यों विकसित हो रहा है, या इसका कारण क्या रहा। कारण के प्रति यह समझ का अभाव विच्छेद की भावना उत्पन्न करता है -- विकसित होता गुण जड़हीन और असमर्थित प्रतीत होता है। जब स्वप्न में अनाथ प्रकट हो, तो वह आपको अपने भीतर विकसित हो रहे किसी गुण के उद्गम की जाँच करने के लिए कह रहा होता है। यह नया होने का ढंग कहाँ से आया? किस विचार या अनुभव ने इसके विकास को आरंभ किया? जो आप बन रहे हैं उसके कारण को समझना आपको उसे दिशा देने की शक्ति देता है। उस समझ के बिना विकसित होता गुण असमर्थित रहता है -- माता-पिता बिना बालक की तरह। उस गुण को उसकी जड़ तक खोजें। कारण ढूँढें। अपने ही विकसित होते पहलुओं के सचेत माता-पिता बनें।