स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
द्वैत
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में दो का अर्थ है द्वैत। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन दो क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि दो आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
हर व्यक्ति (indivi-DUAL) का स्वभाव द्वैतमय होता है। भीतरी और बाहरी। आक्रामक और ग्रहणशील। शरीर और आत्मा। चेतन और अवचेतन। 2 के उदय के साथ एक संतुलन आता है। चलने के लिए 2 पैर, सवारी के लिए 2 पहिए। शरीर के दो पक्ष। मनुष्य के दो पक्ष -- पुरुष और स्त्री। एक बार जब कोई विचार गति में आता है, तो अब दो प्रतिबिंब हो जाते हैं। एक चेतन मन के भीतर और एक अवचेतन मन के भीतर। जब कोई फ़ोटोग्राफ़र किसी अँधेरे कमरे में निगेटिव फ़िल्म से तस्वीर बनाता है, तो वह निगेटिव के आर-पार प्रकाश डालकर उसे कागज़ के एक अलग टुकड़े पर उतारता है। वही प्रतिबिंब कागज़ पर अंकित हो जाता है और अब फ़ोटोग्राफ़र के पास 2 प्रतिबिंब हैं। यह तकनीक मन की आंतरिक तकनीक पर ही आधारित है। जब हम चेतन मन के भीतर के विचार-प्रतिबिंबों पर पर्याप्त प्रकाश डालते हैं, तो एक समरूप किंतु अलग प्रतिबिंब अवचेतन मन पर अंकित हो जाता है। अब 2 प्रतिबिंब हैं। द्वैत। जब 2 आपके स्वप्नों में प्रकट होता है, तो वह आपको स्वयं के द्वैतमय स्वभाव पर ध्यान देने के लिए पुकार रहा होता है। भीतरी अवचेतन मन और बाहरी चेतन मन। भौतिक शरीर का आक्रामक स्वभाव और आत्मा का ग्रहणशील स्वभाव। चेतन मन की तर्क-शक्ति और अवचेतन मन की अंतर्ज्ञान-शक्ति।