स्वप्न प्रतीक · मन की सार्वभौमिक भाषा
एक विराट प्रतिमान-परिवर्तन (paradigm shift)
CHITTA के मन की सार्वभौमिक भाषा के अनुसार, सपने में संसार का अंत का अर्थ है एक विराट प्रतिमान-परिवर्तन (paradigm shift)। यह अर्थ हर स्वप्नदर्शी के लिए एक ही रहता है — लेकिन संसार का अंत क्या कह रहा है, वह नहीं: संदेश इस बात से बनता है कि संसार का अंत आपके सपने में कहाँ आता है और उसके साथ क्या होता है।
स्वप्न में 'संसार का अंत' एक विराट प्रतिमान-परिवर्तन का प्रतीक है — आपके भीतर किसी संपूर्ण वास्तविकता या जीवन-दृष्टि का अंत और एक नई का आरंभ। स्वप्न का संसार आपकी अपनी चेतना है; अतः इसका अंत बाहरी विनाश को नहीं, बल्कि एक पुरानी मानसिक अवस्था, पहचान या विश्वास-प्रणाली के पूर्ण विघटन को दर्शाता है। मन की सार्वभौमिक भाषा में, यह उस गहन क्षण को दर्शाता है जब जीने और संसार को देखने का पुराना ढंग समाप्त हो रहा है ताकि एक उच्चतर, अधिक विस्तृत जागरूकता उभर सके। हर अंत एक आरंभ का द्वार है; पुराने का अंत भयावह लग सकता है क्योंकि अहंकार परिचित से चिपका रहता है, किंतु यह विघटन रूपांतरण के लिए अनिवार्य है। ध्यान दें कि आप कैसा अनुभव कर रहे हैं — भय या शांति — और क्या अंत के पश्चात कुछ नया उभरता है। आपका जीवित बचना यह दर्शाता है कि आपका सच्चा स्व इस आंतरिक मृत्यु और पुनर्जन्म से परे बना रहता है। जब यह प्रतीक प्रकट हो, तो आप अपनी चेतना में एक आधारभूत परिवर्तन से गुज़र रहे हैं। विरोध न करें — पुराने संसार को जाने दें, और उस नई जागरूकता को विश्वास के साथ अपनाएँ जो उसका स्थान लेने उभर रही है।